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अनुशासन पर्व
अध्याय ४८
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भीष्म उवाच
ते चापि सदृशं वर्णं जनय़न्ति स्वय़ोनिषु |  १६   क
परस्परस्य वर्तन्तो जनय़न्ति विगर्हितान् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति