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अनुशासन पर्व
अध्याय ४८
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भीष्म उवाच
परं शवाद्व्राह्मणस्यैष पुत्रः; शूद्रापुत्रं पारशवं तमाहुः |  ५   क
शुश्रूषकः स्वस्य कुलस्य स स्या; त्स्वं चारित्रं नित्यमथो न जह्यात् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति