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शल्य पर्व
अध्याय २२
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सञ्जय़ उवाच
वर्तमाने तथा युद्धे घोररूपे भय़ानके |  १   क
अभज्यत वलं तत्र तव पुत्रस्य पाण्डवैः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति