आदि पर्व  अध्याय २

सूत उवाच

कर्णदुर्योधनादीनां दुष्टं विज्ञाय़ मन्त्रितम् |  १४७   क
योगेश्वरत्वं कृष्णेन यत्र राजसु दर्शितम् ||  १४७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति