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वन पर्व
अध्याय ४८
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सञ्जय़ उवाच
अमर्षितो हि कृष्णोऽपि दृष्ट्वा पार्थांस्तथागतान् |  १६   क
कृष्णाजिनोत्तरासङ्गानव्रवीच्च युधिष्ठिरम् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति