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विराट पर्व
अध्याय ४८
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अर्जुन उवाच
राजानं नात्र पश्यामि गाः समादाय़ गच्छति |  ११   क
दक्षिणं मार्गमास्थाय़ शङ्के जीवपराय़णः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति