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भीष्म पर्व
अध्याय ४८
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सञ्जय़ उवाच
ततः क्रुद्धो महाराज भीष्मः प्रहरतां वरः |  ४९   क
वासुदेवं त्रिभिर्वाणैराजघान स्तनान्तरे ||  ४९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति