उद्योग पर्व  अध्याय १७

अगस्त्य उवाच

य इमे व्रह्मणा प्रोक्ता मन्त्रा वै प्रोक्षणे गवाम् |  ९   क
एते प्रमाणं भवत उताहो नेति वासव |  ९   ख
नहुषो नेति तानाह तमसा मूढचेतनः ||  ९   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति