उद्योग पर्व  अध्याय ४३

सनत्सुजात उवाच

छन्दांसि नाम क्षत्रिय़ तान्यथर्वा; जगौ पुरस्तादृषिसर्ग एषः |  ३०   क
छन्दोविदस्ते य उ तानधीत्य; न वेद्यवेदस्य विदुर्न वेद्यम् ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति