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शल्य पर्व
अध्याय ४८
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वैशम्पाय़न उवाच
यत्रानय़ामास तदा राजसूय़ं महीपते |  ११   क
पुत्रोऽदितेर्महाभागो वरुणो वै सितप्रभः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति