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शल्य पर्व
अध्याय ४८
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्या नद्यास्तु तीरे वै सर्वे देवाः सवासवाः |  १८   क
विश्वेदेवाः समरुतो गन्धर्वाप्सरसश्च ह ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति