आदि पर्व  अध्याय ४९

वासुकिरु उवाच

आस्तीक परिघूर्णामि हृदय़ं मे विदीर्यते |  २२   क
दिशश्च न प्रजानामि व्रह्मदण्डनिपीडितः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति