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शान्ति पर्व
अध्याय ४९
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वासुदेव उवाच
जनिष्यते हि ते भ्राता व्रह्मभूतस्तपोधनः |  १९   क
विश्वं हि व्रह्म तपसा मय़ा तत्र समर्पितम् ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति