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शान्ति पर्व
अध्याय ४९
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वासुदेव उवाच
यथा च जामदग्न्येन कोटिशः क्षत्रिय़ा हताः |  २   क
उद्भूता राजवंशेषु ये भूय़ो भारते हताः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति