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शान्ति पर्व
अध्याय ४९
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वासुदेव उवाच
आर्चीको जनय़ामास जमदग्निः सुदारुणम् |  २९   क
सर्वविद्यान्तगं श्रेष्ठं धनुर्वेदे च पारगम् |  २९   ख
रामं क्षत्रिय़हन्तारं प्रदीप्तमिव पावकम् ||  २९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति