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शान्ति पर्व
अध्याय ४९
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वासुदेव उवाच
आपवस्तं ततो रोषाच्छशापार्जुनमच्युत |  ३६   क
दग्धेऽऽश्रमे महाराज कार्तवीर्येण वीर्यवान् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति