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शान्ति पर्व
अध्याय ९७
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भीष्म उवाच
अल्पेनापि हि संय़ुक्तस्तुष्यत्येवापराधिकः |  १५   क
शुद्धं जीवितमेवापि तादृशो वहु मन्यते ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति