शान्ति पर्व  अध्याय ४९

वासुदेव उवाच

स हैहय़सहस्राणि हत्वा परममन्युमान् |  ४६   क
चकार भार्गवो राजन्महीं शोणितकर्दमाम् ||  ४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति