शान्ति पर्व  अध्याय ४९

वासुदेव उवाच

स पुनः क्षत्रिय़शतैः पृथिवीमनुसन्तताम् |  ५२   क
परावसोस्तदा श्रुत्वा शस्त्रं जग्राह भार्गवः ||  ५२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति