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शान्ति पर्व
अध्याय ४९
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वासुदेव उवाच
गच्छ पारं समुद्रस्य दक्षिणस्य महामुने |  ५८   क
न ते मद्विषय़े राम वस्तव्यमिह कर्हिचित् ||  ५८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति