शान्ति पर्व  अध्याय ४९

वासुदेव उवाच

कश्यपस्तु महाराज प्रतिगृह्य महीमिमाम् |  ६०   क
कृत्वा व्राह्मणसंस्थां वै प्रविवेश महावनम् ||  ६०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति