शान्ति पर्व  अध्याय ४९

वासुदेव उवाच

वृहद्रथो महावाहुर्भुवि भूतिपुरस्कृतः |  ७३   क
गोलाङ्गूलैर्महाभागो गृध्रकूटेऽभिरक्षितः ||  ७३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति