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अनुशासन पर्व
अध्याय ४९
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भीष्म उवाच
आत्मजं पुत्रमुत्पाद्य यस्त्यजेत्कारणान्तरे |  १५   क
न तत्र कारणं रेतः स क्षेत्रस्वामिनो भवेत् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति