अनुशासन पर्व  अध्याय ५०

भीष्म उवाच

स मुनिस्तत्तदा दृष्ट्वा मत्स्यानां कदनं कृतम् |  २२   क
वभूव कृपय़ाविष्टो निःश्वसंश्च पुनः पुनः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति