आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ४९

व्रह्मो उवाच

अतः परं प्रवक्ष्यामि सत्त्वक्षेत्रज्ञय़ोर्यथा |  ७   क
संय़ोगो विप्रय़ोगश्च तन्निवोधत सत्तमाः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति