वन पर्व  अध्याय ८३

पुलस्त्य उवाच

ततो वैतरणीं गत्वा नदीं पापप्रमोचनीम् |  ६   क
विरजं तीर्थमासाद्य विराजति यथा शशी ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति