वन पर्व  अध्याय ४९

वृहदश्व उवाच

स निकृत्या जितो राजा पुष्करेणेति नः श्रुतम् |  ४०   क
वनवासमदुःखार्हो भार्यया न्यवसत्सह ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति