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उद्योग पर्व
अध्याय ४९
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वैशम्पाय़न उवाच
पाञ्चालस्य सुता जज्ञे दैवाच्च स पुनः पुमान् |  ३२   क
स्त्रीपुंसोः पुरुषव्याघ्र यः स वेद गुणागुणान् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति