menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
गच्छाम्यहं वनमेवाद्य पापः; सुखं भवान्वर्ततां मद्विहीनः |  १०४   क
योग्यो राजा भीमसेनो महात्मा; क्लीवस्य वा मम किं राज्यकृत्यम् ||  १०४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति