menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
इत्येवमुक्त्वा सहसोत्पपात; राजा ततस्तच्छय़नं विहाय़ |  १०६   क
इय़ेष निर्गन्तुमथो वनाय़; तं वासुदेवः प्रणतोऽभ्युवाच ||  १०६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति