अनुशासन पर्व  अध्याय १६

वासुदेव उवाच

एतत्पदमनुद्विग्नमेतद्व्रह्म सनातनम् |  ५६   क
शास्त्रवेदाङ्गविदुषामेतद्ध्यानं परं पदम् ||  ५६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति