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उद्योग पर्व
अध्याय ८२
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वैशम्पाय़न उवाच
यत्र यत्र तु वार्ष्णेय़ो वर्तते पथि भारत |  ११   क
तत्र तत्र सुखो वाय़ुः सर्वं चासीत्प्रदक्षिणम् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति