कर्ण पर्व  अध्याय ४९

कृष्ण उवाच

स गुरुं पार्थ कस्मात्त्वं हन्या धर्ममनुस्मरन् |  २४   क
असम्प्रधार्य धर्माणां गतिं सूक्ष्मां दुरन्वय़ाम् ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति