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कर्ण पर्व
अध्याय ४९
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कृष्ण उवाच
मृगव्याधोऽभवत्कश्चिद्वलाको नाम भारत |  ३४   क
यात्रार्थं पुत्रदारस्य मृगान्हन्ति न कामतः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति