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कर्ण पर्व
अध्याय ४९
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अर्जुन उवाच
न हि ते त्रिषु लोकेषु विद्यतेऽविदितं क्वचित् |  ५९   क
तस्माद्भवान्परं धर्मं वेद सर्वं यथातथम् ||  ५९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति