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कर्ण पर्व
अध्याय ४९
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सञ्जय़ उवाच
महारथान्नागवरान्हय़ांश्च; पदातिमुख्यानपि च प्रमथ्य |  ७८   क
एको भीमो धार्तराष्ट्रेषु मग्नः; स मामुपालव्धुमरिन्दमोऽर्हति ||  ७८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति