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द्रोण पर्व
अध्याय ६५
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सञ्जय़ उवाच
एवं दुःशासनवलं वध्यमानं किरीटिना |  ३१   क
सम्प्राद्रवन्महाराज व्यथितं वै सनाय़कम् ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति