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शल्य पर्व
अध्याय ४९
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वैशम्पाय़न उवाच
अश्वमेधं क्रतुवरं नरमेधं तथैव च |  ३५   क
आहरन्ति नरश्रेष्ठास्तेषां लोकेष्वपश्यत ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति