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शल्य पर्व
अध्याय ४९
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वैशम्पाय़न उवाच
त्रीँल्लोकानपरान्विप्रमुत्पतन्तं स्वतेजसा |  ४१   क
पतिव्रतानां लोकांश्च व्रजन्तं सोऽन्वपश्यत ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति