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शल्य पर्व
अध्याय ४९
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सिद्धा ऊचुः
तत्राप्युपस्पृश्य ततो महात्मा; दत्त्वा च वित्तं हलभृद्द्विजेभ्यः |  ६५   क
अवाप्य धर्मं परमार्यकर्मा; जगाम सोमस्य महत्स तीर्थम् ||  ६५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति