अनुशासन पर्व  अध्याय ९६

वालखिल्या ऊचुः

एकपादेन वृत्त्यर्थं ग्रामद्वारे स तिष्ठतु |  ३९   क
धर्मज्ञस्त्यक्तधर्मोऽस्तु यस्ते हरति पुष्करम् ||  ३९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति