आदि पर्व  अध्याय ५

सूत उवाच

सेय़ं यदि वरारोहा भृगोर्भार्या रहोगता |  २०   क
तथा सत्यं समाख्याहि जिहीर्षाम्याश्रमादिमाम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति