आदि पर्व  अध्याय ५

सूत उवाच

तद्रक्ष एवमामन्त्र्य ज्वलितं जातवेदसम् |  २२   क
शङ्कमानो भृगोर्भार्यां पुनः पुनरपृच्छत ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति