सौप्तिक पर्व  अध्याय ५

अश्वत्थामो उवाच

दुर्योधनश्च भीमेन समेत्य गदय़ा मृधे |  २१   क
पश्यतां भूमिपालानामधर्मेण निपातितः ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति