वन पर्व  अध्याय २०६

युधिष्ठिर उवाच

सुखश्रव्यतय़ा विद्वन्मुहूर्तमिव मे गतम् |  ३४   क
न हि तृप्तोऽस्मि भगवञ्शृण्वानो धर्ममुत्तमम् ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति