स्त्री पर्व  अध्याय ५

विदुर उवाच

व्यालैश्च वनदुर्गान्ते स्त्रिय़ा च परमोग्रय़ा |  २०   क
कूपाधस्ताच्च नागेन वीनाहे कुञ्जरेण च ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति