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द्रोण पर्व
अध्याय १६६
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सञ्जय़ उवाच
तच्छ्रुत्वा द्रोणपुत्रस्य पर्यवर्तत वाहिनी |  ५७   क
ततः सर्वे महाशङ्खान्दध्मुः पुरुषसत्तमाः ||  ५७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति