आदि पर्व  अध्याय ७९

यदुरु उवाच

सितश्मश्रुशिरा दीनो जरय़ा शिथिलीकृतः |  ५   क
वलीसन्ततगात्रश्च दुर्दर्शो दुर्वलः कृशः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति