अनुशासन पर्व  अध्याय ५

भीष्म उवाच

शुक भोः पक्षिणां श्रेष्ठ दाक्षेय़ी सुप्रजास्त्वय़ा |  १२   क
पृच्छे त्वा शुष्कमेतं वै कस्मान्न त्यजसि द्रुमम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति