आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ५

व्यास उवाच

त्वमाजहर्थ देवानामेको वीर श्रिय़ं पराम् |  २२   क
त्वं विभर्षि भुवं द्यां च सदैव वलसूदन ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति